परिमेय संख्याएँ
संवरक नियम दो परिमेय संख्याओ का योग या गुणाफल भी परिमेय होता है क्रमविनिमय नियम यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हो, तो 1. योग का क्रमविनिमय नियम a + b = b + a 2. गुणात्मक क्रमविनिमय नियम a × b = b × a साहचर्य नियम यदि a ,b और c तीन […]
संवरक नियम दो परिमेय संख्याओ का योग या गुणाफल भी परिमेय होता है क्रमविनिमय नियम यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हो, तो 1. योग का क्रमविनिमय नियम a + b = b + a 2. गुणात्मक क्रमविनिमय नियम a × b = b × a साहचर्य नियम यदि a ,b और c तीन […]
P(A) + P(A’) = 1, जहाँ A कोई घटना हैं तथा A’ इसकी पूरक घटना हैं. घटना के अनुकूल संयोगानुपात E = P(E) : P(E’) घटना के प्रतिकूल संयोगानुपात E = P(E’) : P(E) यदि घटना के अनुकूल संयोगानुपात = a : b तो P(E) = a/(a +b) यदि घटना E का प्रतिकूल संयोगानुपात = a : b तो P(E)
सांख्यिकी: गणित की वह शाखा, जिसमे आँकड़ों के संग्रह प्रस्तुतीकरण और विश्लेषण पर आँकड़े से अर्थ पूर्ण निष्कर्ष नकालने के सम्बन्ध में अध्ययन किया जाता है, उसे सांख्यिकी कहा जाता है।मध्यिका फार्मूला = (l + n/2 – CF) / f × h l = मध्यक वर्ग की निम्नसीमा n = प्रेक्षकों की संख्या CF = मध्यक वर्ग
वृत्त का क्षेत्रफल πr2 या πd2/4 वृत्त की त्रिज्या, r √(क्षेत्रफल / π) वृताकार वलय का क्षेत्रफल π (R2 – r2) अर्द्धवृत्त की परिधि ( π r + 2 r ) अर्द्धवृत्त का क्षेत्रफल 1/2πr² त्रिज्याखण्ड का क्षेत्रफल θ/360° × πr² चाप की लम्बाई θ/360° × 2πr त्रिज्याखण्ड की परिमिति 2r + πrθ/180° वृतखण्ड का क्षेत्रफल (πθ/360° –
समकोण त्रिभुज के तीनों भुजाओं एवं कोणों का अध्ययन त्रिकोणमिति में किया जाता है. जिसमे सबसे बड़ी भुजा कर्ण, 90 डिग्री के सामाने खड़ी भुजा लम्ब और शेष भुजा आधार कहलाती है। Sin θ लम्ब / कर्ण = p / h Cos θ आधार / कर्ण = b / h Tan θ लम्ब / आधार = p
निर्देशांक ज्यामिति: ज्यामितिय शाखाओं का वह समूह है, जहां निर्देशांक का उपयोग करके एक बिंदु की स्थिति को परिभाषित किया जाता है, वह निर्देशांक ज्यामिति कहलाता है। निर्देशांक की बिंदु ज्ञात करने के लिए निम्न फार्मूला का प्रयोग किया जाता है. चतुर्थांश का चिन्ह: प्रथम पाद = ( +, + ) द्वितीय पाद = (
निर्देशांक ज्यामिति Read More »
समान्तर श्रेढ़ी: एक ऐसा अनुक्रम या श्रेणी है जिसमे प्रथम पद के अतिरिक्त प्रत्येक पद उससे पूर्व पद में एक निश्चित संख्या जोड़ने या घटाने पर प्राप्त होता है। जैसे: a1, a2, a3, a4, a5, a6……an AP के प्रथम पद को a1, दुसरे पद को a2, …… nवें पद को an तथा सार्व अंतर को
(a+b)2 = a2 + b2 + 2ab (a-b)2 = a2 + b2 – 2ab (a+b) (a-b) = a2 – b2 (x + a)(x + b) = x2 + (a + b)x + ab (x + a)(x – b) = x2 + (a – b)x – ab (x – a)(x + b) = x2 + (b – a)x – ab (x – a)(x – b) =
अंकगणित के महत्वपूर्ण फार्मूला Read More »
द्विघात समीकरण: चर x में समीकरण ax2+bx+c=0 के प्रकार को एक द्विघात समीकरण कहते हैं. जहाँ a ≠ 0, a, b और c अचर राशियाँ हो। मूलों की प्रकृति : समीकरण ax2 + bx + c = 0 का यदि विविक्तकर b2 − 4ac > 0 हो, तो समीकरण के दो भिन्न वास्तविक मूल होते हैं। द्विघात समीकरण = [
रैखिक समीकरण: किसी समीकरण में उपस्थित दो चर, दो चर वाले रैखिक समीकरण कहलाते है। ax + by + c = 0 जहाँ a ≠ 0, b ≠ 0 a, b, c अचर तथा x, y चर हो. रैखिक समीकरण का लेखाचित्र एक सरल रेखा में होती है x = c जहाँ c = अचर है,
दो चार वाले रैखिक समीकरण Read More »