Chapter 12: विधुत

विधुत धारा और परिपथ विधुत धारा (Electric Current): एक चालक के माध्यम से विद्युत आवेश का प्रवाह। एम्पियर (A) में मापी जाती है। प्रतीक I द्वारा प्रदर्शित। I=Q/I = जहाँ Q कुलॉम्ब में आवेश है और t सेकंड में समय है। विधुत परिपथ (Electric Circuit): एक बंद मार्ग जिसमें से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। […]

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Chapter 11: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

मानव नेत्र की संरचना: कॉर्निया: नेत्र का पारदर्शी अग्रभाग जो आइरिस, पुतली और पूर्व कक्ष को ढकता है। आइरिस: नेत्र का रंगीन भाग जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है। पुतली: आइरिस के केंद्र में खुलने वाला हिस्सा जो नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है। लेंस: एक पारदर्शी,

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Chapter 10: प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रकाश (Light) एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमें देखने में सक्षम बनाती है। यह सीधी रेखाओं में गमन करती है और इसके गमन के दौरान परावर्तन (Reflection) तथा अपवर्तन (Refraction) जैसी घटनाएँ घटित होती हैं। 1. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) परावर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की किरणें एक सतह से टकराकर

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Chapter 9: आनुवंशिकता एवं जैव विकास

आनुवंशिकता (Heredity) और जैव विकास (Evolution) जीव विज्ञान के दो महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं। आनुवंशिकता उन लक्षणों के संचरण को संदर्भित करती है जो माता-पिता से संतानों में जाते हैं, जबकि जैव विकास से अभिप्राय उन परिवर्तनों से है जो जीवों में समय के साथ उत्पन्न होते हैं। 1. आनुवंशिकता (Heredity) आनुवंशिकता वह प्रक्रिया है जिसमें

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Chapter 8: जीव जनन कैसे करते हैं?

जनन (Reproduction) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव नए संतानों का उत्पादन करते हैं। यह प्रक्रिया जीवों की संख्या बढ़ाने और उनके अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक होती है। 1. जनन के प्रकार (Types of Reproduction) जनन दो प्रकार के होते हैं: अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें एक ही माता-पिता से संतानों का उत्पादन

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Chapter 6: जैव प्रक्रम

जैव प्रक्रम (Life Processes) में उन सभी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है जो जीवों के जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती हैं। इसमें पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन आदि शामिल हैं। 1. पोषण (Nutrition) पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण करते हैं और उनका उपयोग करते हैं।

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Chapter 7: नियंत्रण एवं समन्वय प्रस्तावना

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) वह प्रक्रियाएँ हैं जिनके द्वारा जीव अपने शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों के बीच तालमेल बनाए रखते हैं। यह प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र और हार्मोनल तंत्र के माध्यम से संपन्न होती है। 1. तंत्रिका तंत्र (Nervous System) तंत्रिका तंत्र वह प्रणाली है जो तंत्रिकाओं के माध्यम से संदेशों का

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Chapter 5: तत्वों का वर्गीकरण

तत्वों का वर्गीकरण रसायनशास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है। यह तत्वों को उनकी भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर विभिन्न समूहों में विभाजित करता है। 1. प्राचीन वर्गीकरण चार तत्वों का सिद्धांत: प्राचीन काल में, तत्वों को चार मुख्य तत्वों में विभाजित किया गया था: पृथ्वी (Earth) पानी (Water) आग (Fire) हवा

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Chapter 4: कार्बन एवं उसके यौगिक

परिचय कार्बन (Carbon): एक रासायनिक तत्व है जो सभी जीवित प्राणियों में पाया जाता है और कई यौगिकों का आधार है। कार्बन के यौगिक: कार्बन और अन्य तत्वों के बीच संयोजनों को यौगिक कहा जाता है। ये यौगिक अत्यधिक विविध होते हैं और जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। कार्बन के गुण उच्च संख्यात्मक संयोजन: कार्बन

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Chapter 3: धातु और अधातु

परिचय धातु (Metals): ठोस पदार्थ जो विद्युत और ऊष्मा के अच्छे चालक होते हैं, आमतौर पर चमकदार होते हैं, और इन्हें पीटकर पतला किया जा सकता है। अधातु (Non-Metals): वे पदार्थ जो ठोस, तरल या गैस हो सकते हैं, विद्युत और ऊष्मा के अच्छे चालक नहीं होते हैं, और इनमें चमक नहीं होती। धातुओं के

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